Skip to main content

kamyab hone ke 7 best easy ways

kamyab hone ke 7 best easy ways

kamyab-successful-hone-ke-7-best-easy-ways

kamyabi प्राप्त करने का प्रत्येक व्यक्ति का अपना तरीका  होता है और  प्रत्येक व्यक्ति के लिए  कामयाबी (kamyabi) का अर्थ अलग अलग हो सकता है।  कोई धन प्राप्त करने को kamyabi  कह सकता है , तो कोई संतोष एवं खुशी से जीवन जीने को कामयाबी (kamyabi) कह सकता है। 

  • लेकिन मेरे हिसाब से कामयाबी (kamyabi)  का मूल अर्थ कुछ और है।
  • kamyab (कामयाब ), successful  होना वैसा ही है , जैसे पेड़ की जड़ों द्वारा पेड़ को मजबूती देने के साथ साथ खाद और पानी भी यथा समय पहुंचाया जाता है। 

पौधे , पेड़ बनकर हमारे  लिए ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। गहराई में जाए तो पेड़  एक कामयाबी या सफलता का   उदाहरण हो सकता है। 

पेड़ का पूरा जीवन जड़ों पर आधारित है।  पेड़ का अस्तित्व जड़ों से है, पेड़ आक्सीजन देकर , दूसरों के लिए अपने होने का अर्थ दे रहा है। वैसे ही एक kamyab (कामयाब ) successful  मनुष्य का जीवन होता है।

हमारा way of living  ही जीवन में, हमारे (कामयाब )   kamyab ( successful ) hone ko  प्रभावित करता है। हम आज जहां पर हैं,  जिस भी  हालात में हैं, इन सब का एक ही कारण होता है। हमारे सोचने का ढंग कैसा है?

  • किसी व्यक्ति का जीवन को देखने का नजरिया,समस्याओं पर प्रतिक्रिया करने का दृष्टिकोण एवं जिम्मेदारी निभाने का उत्तरदायित्व, इस बात पर निर्भर करता है, कि व्यक्ति परिपक्व है या नहीं। 
  • जहां व्यक्ति की thought process  सकारात्मक रूप से व्यक्त होती है, वही व्यक्ति का जीवन को देखने का नजरिया परिपक्वता के हिसाब से विस्तृत होता जाता है।यहीं से एक व्यक्ति की (kamyab )  कामयाब (successful ) hone का  best easy way निकलता है। 
मैं आज इस ब्लॉग के माध्यम kamyab hone ke 7 best easy ways पर चर्चा कर रहा हूं , कि कैसे हम thought process  को change करके अपनी kamyabi को सुदृढ़ कर सकते हैं। 

Social Kamyabi verses Personal kamyabi: सामाजिक. कामयाबी से पहले व्यक्तिगत kamyabi होती है।

जब तक हम यह नहीं जानते हैं, कि खुद को हम किस तरह देखते हैं। तब तक हम दूसरों को नहीं समझ सकते हैं। इसी कारण हम यह भी नहीं समझ सकते हैं,कि दूसरे स्वयं को तथा दूसरों को किस  रह देखते हैं। 

इस विचार प्रक्रिया के कारण , आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी बात को दूसरों पर थोप देता है।  बिना यह जाने कि दूसरे के विचार एक  दूसरे के प्रति कैसे हैं ? यहीं विचार हमारे  kamyab hone ki  मुश्किलें  बनते  हैं।
  • इस कारण जीवन को देखने का नजरिया संकीर्ण होता है। thought process  के द्वारा ही हम जीवन को नए विस्तृत नजरिये से देख  सकते  हैं।  प्रत्येक व्यक्ति अपने को निष्पक्ष समझता है ,क्योंकि वह खुद को अभी पूरी तरह जान ही  नहीं पाया है। 
इसी कारण प्रत्येक व्यक्ति की दूसरे से जुड़ने की योग्यता क्षीण होती जा रही है और प्रत्येक व्यक्ति अपने को अलग थलग महसूस कर रहा है। 
इस समस्या का समाधान यही है कि पहले अपने आप को जानें कि मैं कौन हूं। मेरी पहचान क्या है ? ये  प्रश्न हमे आत्म जागरूकता की ओर ले जाते हैं। 
आज हमारा स्वरूप,विचार और सोचने का तरीका आदि हमारे नहीं है। यह सब हमने बाहर से प्राप्त किया है। इन्ही thought process के कारण हम और आप अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 

kamyab hone ke 7 best easy ways

1:Character based kamyabi: चरित्र आधारित दृष्टिकोण अपनाना। 

चरित्र आधारित दृष्टिकोण, हमारे शब्दों और कार्यों से अधिक ऊंचे स्वर में बोलता है। अर्थात हमें पहले खुद से वादा  करना और निभाना आना चाहिए। तभी हम दूसरों से वादा करना और निभाना कर पाएंगे। 
  • हम लाख कोशिश करें , कि हमारे सुधारे बिना दूसरे सुधर जाएं , तो यह हमारी भूल है। 
  • हमारा  दिमाग  मौन होकर काम करता  रहता  है। हम जैसा सोचता है, वैसी vibration create करते हैं।   यही vibration  दूसरों  तक  पहले पहुंचती  हैं। चाहे  हम कैसे भी मुखौटा पहन ले। 
इसलिए व्यक्तिगत जीवन में चरित्र  आधारित सिद्धांत को लेकर अपने नए way of living बनाने होंगें । तभी हम जीवन में  kamyab (कामयाब ) successful  होंगे। 

  • हम जो सोचते हैं, वही हम बनते हैं।
  • हमारा दृष्टिकोण  इस बात से तय होता है ,कि हम क्या और कैसे सोचते हैं ? 
वही से  हमारी kamyab (कामयाब) successful  hone की शुरुआत होती है हम लोगों के साथ व्यवहार बहुत अच्छा कर सकते हैं, लेकिन अगर अंदर से आप  वैसे नहीं है, जैसा व्यवहार करते हैं।  तो आपका प्रभाव दूसरों पर  नहीं पड़ेगा। 

कहते हैं कि "दिल से आवाज निकलती है, तो असर जरूर करती है"। इसलिए हमेशा  हमेशा वही बने  रहे जैसा आप महसूस करते हैं।  न कि वैसा जैसा लोग चाहते हैं। 

आपकी अपनी जिंदगी है,  इसलिए चरित्र  आधारित दृष्टिकोण  को बनायें। एक kamyab (कामयाब) successful  hone का  best easy way है।  यह वैसा ही है , जैसे पेड़ की जड़ों में पानी डालना। अपने  मूल गुणों के साथ सामंजस्य जरूरी है।

2:Take Your Responsibility:  जिम्मेदारी लेना। 

मैं , सिर्फ मैं ही अपनी ग़लती  के लिए जिम्मेदार हूँ। यह वाक्य हमारे   सोचने के तरीके को change कर देता है। इस जीवन में गलती होना, हमारे मनुष्य होने का प्रथम प्रमाण है। 

ऐसा कोई नहीं है, जिसनें कभी गलती ना की हो। लेकिन ऐसा कोई नहीं है , जिसनें खुले दिल से गलती स्वीकार की हो।  गलती होने  पर या काम सही तरीके से नही नहीं होने पर  ये शब्द कहें हो। 

  • अमुख गलती के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं,
  • मैं गलती की जिम्मेदार लेता हूँ। 
ऐसा हम कभी नहीं सोचते हैं और यही हमारी kamyab (कामयाब) successful  न hone का सबसे बड़ा कारण है। इन्ही वाक्यों में हमारी kamyab (कामयाब) successful  hone  की छमता है।  
क्या हमने उपरोक्त तथ्यों पर कभी गौर से सोचा है ?  गलती होने पर, हम हमेशा जिम्मेदार दूसरों पर डालने की सोचते हैं।  गलती होने या न होने पर भी हम निम्न तथ्यों को अपने पक्ष में ही कहते  और करते आए हैं।
  • जैसे मेरी कोई गलती नहीं है ।
  • मैं कोई गलत काम नहीं कर सकता हूं।
  • मैं ही अच्छा हूं। मैं सही हूं। 
  • मैं  जो कह रहा हूं, वही समस्या का सर्वोत्तम हल  है।
  • मेरा ही विचार सर्वोत्तम है।
  • मेरा ही काम सर्वोत्तम है।
  • मैं  जो कुछ भी कर रहा हूं,वह सब सही है ।
जब  कोई दूसरा व्यक्ति हमारी किसी बात को नहीं मानता है, तो हम उसे गलत ठहराते हैं।इस प्रकार की thought process अपरिपक्वता की निशानी है। 
एक परिपक्व व्यक्ति हमेशा जिम्मेदारी स्वीकार करता है। चाहे उसकी गलती हो, या ना हो।  
  • जिम्मेदारी लेने से हमारा दृष्टिकोण व्यापक होता है। 
  • हमारे दिमाग में, गलती या समस्या को हल करने के लिए बहुत सारे विकल्प मिल जाते हैं। 
  • जिम्मेदारी लेना अपने आपको दूसरों से अलग और मजबूत बनने का best easy way है।  
  • यही kamyab (कामयाब) successful  hone का best easy way हैं। 
जब हम किसी भी बात के लिए जिम्मेदारी लेते  हैं , तो हमारी respond करने की क्षमता विस्तृत हो जाती है। हमारे पास समस्याओं को हल करने के कुछ ज्यादा विकल्प होते हैं। हमारे प्रतिक्रिया करने का नजरिया बदल जाता है।
इस कारण हमारा हुए way of living standards भी दूसरों से अलग हो जाता है। यहीं से हमारी परिपक्वता की पहचान विकसित होती है। इसी सोच के साथ हम किसी भी क्षेत्र में  kamyab (कामयाब) successful  हो सकते हैं। 

3:  Inner Software पर विश्वास करना।

ऊपर जितनी भी बातें हमने सोची है, लिखी हैं , इन सब से हमारा inner software  अछूता रहता है। हमारा inner software प्रकृति का शाश्वत सत्य है, यह प्रकृति के अनुसार कार्य करता है । 
हमने जो भी बातें  उपर लिखी हैं, वह हमें समाज से, हमारे बड़ों से एवं हमारे गुरुजनों से जाने अनजाने में प्राप्त हुई हैं। बचपन से लेकर आज तक हम जो सुनते आए हैं, जो भी सूचनाएं इकट्ठी करते आए हैं , उसी के अनुसार हमारा सोचने का तरीका बना है। इसी thought process को बदलना है। 
  • हमारे चारों ओर का माहौल, जहाँ हम रहते हैं। जिस भी धर्म, क्षेत्र, देश में पले बडे़ हैं उसी प्रकार का हमारा सोचने का तरीका बन जाता है। और यही हमारा  way of living standards बनता है।
क्योंकि समाज का प्रत्येक व्यक्ति यही बात सोचता है, जो हमने ऊपर लिखा '"कि मैं गलत नहीं हूं। आप गलत हैं"। न चाहते हुए भी Indirect  तरीके से हम इस प्रकार की सूचनाओं को अपने subconscious mind  में stored  करते रहते हैं । 
  • हमारा Subconscious Mind शरीर में इन बातों को कार्य रूप में परिणित कर देता है।और यह सदा के लिये हमारा व्यवहार बन जाता है, कि एक मात्रा में ही सही हूं और आप गलत हैं। बाकी दुनिया सब गलत है । यह अपरिपक्वता को दर्शाता है। 
  • जैसा  हम सोचते हैं , विचार करते हैं एवं जो  भी जानकारी  समाज से लेते हैं। इन सब से inner software पर   कोई फर्क नहीं पड़ता है। यह inner software हमारा जीवन  है । यही हमारे शरीर में जान डालने का कार्य करता है। जिसे हम "मैं" कहते हैं। 
  • यह सभी व्यक्तियों में सामान रूप से कार्य करता है। गलत  thought process के कारण हम अपने को सही एवं दूसरों को गलत ठहराते हैं।  
  • यदि हम इतनी सी बात को समझ जाएँ की, हम सभी एक ही inner software  द्वारा संचालित हैं, तो हमरा way of living  बदल जायेगा।  गहराई में अपने अंदर झांकने का best outstanding  तरीका है।एक kamyab (कामयाब) successful  व्यक्ति की सोच अपने मूल गुण  अपनी पहचान से शुरू होती हैं। 
  • मैं भी गलत हो सकता हूं। इस thought process के साथ जीवन को देखें। यह कामयाब (kamyab) Successful hone का  मूलभूत गुण है।
  • मेरे में "मैं" inner software  के रूप में काम कर रहा है। लेकिन मेरा conscious Mind लगातार बाहर से  सूचना ले रहा है , इसलिए मेरा  विचार या सोचना गलत भी हो सकता है।
  • मैं भी एक इन्सान हूं। मैं भी इसी मिट्टी से बना हूं, जिस मिट्टी से सामने वाला बना है।
  • मेरे अन्दर भी वही inner software है जो सामने वाले के अन्दर है।
  • जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव अलग अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति का सोचने का तरीका भी अलग होता है।
अपनी जगह हम दोनों व्यक्ति सही है।
उदाहरण के तौर पर : दो व्यक्ति A और B एक दूसरे की ओर मुँह कारक बैठे है।  बीच में टेबल पर रखी है।   को देखने का नजरिया दोनों व्यक्तियों का अलग अलग होगा।  
क्योंकि दोनों एक दूसरे के विपरीत दिशा में बैठे हैं।  दोनों ही व्यक्ति इस किताब पर अपनी भिन्न-भिन्न राय देंगें। इस सिद्धांत या THOUGHT PROCESS का प्रयोग कर हम way of living को बदल सकते हैं। 
  • इसलिए जब भी कुछ काम खराब हो, कुछ गलत हो जाय, कुछ ऐसा हो जाय जो आपको पसंद ना हो, परिणाम आपके फेवर में न आये तो। 
  • सबसे पहले अपने आप से कहना है कि मैं भी सही हूँ एवं सामने वाला भी अपनी जगह सही है। 
  • मैं इस समस्या के लिये जिम्मेदार हूं। मैं अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूँ।  
ये कथन आपको बड़ी सिद्धत से अपने मन से कहना है। जैसे आप अपने इनर साफ्टवेयर से बात कर रहें हों।अपने अवचेतन मन  को बता रहें हों।
मैं और सिर्फ मैं ही अपने बारे में 100% जानता हूं ।                   
  • मैं और सिर्फ मैं ही, अपने बारे में 100% जानता हूं, कि मैं क्या हूं? 
  • मेरी क्या गलतियां है ? 
  • मेरी क्या अछाइयां हैं ? 
  • मेरी शक्ति क्या है ? 
  • मेरे को क्या पसंद है ? 
  • क्या नहीं पसंद है? 
जब मैं अपने बारे में हंड्रेड परसेंट जानता हूं । तो क्यों ना मैं अपनी जिम्मेदारी स्वयं लूं । दूसरे को अपनी नाकामयाबी के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। 

यदि मैं स्वयं को , स्वयं की गलतियों के लिए एवं  नाकामयाबी के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराता  हूं । तभी हम को समस्याओं के उत्तरों के विकल्प मिल सकते हैं, अन्यथा नहीं। 
क्योंकि जब मैं इस शरीर के बारे में सब जानता हूं, तो हमें अपनी नाकामयाबी  के हल बाहर नहीं ढूंढने चाहिए। हमें अपनी नाकामयाबी के हल अपने अंदर ही ढूंढने चाहिए ।

4: Co Dependence : परस्पर निर्भरता 

 निर्भरता तीन प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं
  • निर्भरता 
  • आत्मनिर्भरता 
  • परस्पर निर्भरता 
परस्पर निर्भरता , निर्भरता और आत्मनिर्भरता से ऊपर होती है। परस्पर निर्भरता परिपक्वता की  निशानी है। एक सशक्त kamyab (कामयाब) successful team leader की निशानी है। 
परस्पर निर्भरता वैसे ही, जैसे दो पेड़ कुछ दूरी पर साथ-साथ बड़े होने लगते हैं। दोनों पेड़ एक  दूसरे  की जड़ों को सहारा देने के साथ-साथ जड़ों द्वारा मिट्टी को उपजाऊ तथा मजबूत बनाते हैं। 
परस्पर निर्भर व्यक्ति के रूप में हमारे पास दूसरों  के साथ गहराई से जुडने का  है।  परस्पर निर्भरता हमारे way of living को प्रभावित करता है।  और यही विचार 100% best easy way  है, kamyab (कामयाब) successful hone का। 

5: Experimental Life:अनुभवात्मक जीवन मूल्य।

जो भी हमारे साथ घटित होता है,वह हमारी thought process का हिस्सा बन जाता है।   अनुभव जीवन मूल्य प्रत्येक व्यक्ति के अलग-अलग होते हैं।  इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का way of living  भी अलग अलग होता है। 
अनुभव के आधार पर हम जीवन को समझने का प्रयास करते हैं, लेकिन अनुभव ही जीवन है,ऐसा thought process सही नहीं है। यह अस्तित्व  विशाल है। 
इस अस्तित्व का एक छोटा सा कण  हम भी हैं और हम अपने अनुभव के आधार पर अस्तित्व को नहीं समझ सकते हैं। यदि हम यह बात समझ गए तो हमारा तो वह way of living standardबदल जाएगा। 

6: Prchurta ki mansikta:प्रचुरता की मानसिकता 

प्रचुरता की कमी की मानसिकता वाले लोग अक्सर कहते हैं , कि मेरे लिए सिर्फ इतना ही जबकि दूसरों के लिए तो बहुत कुछ है। यह दृष्टिकोण,आपको कभी भी एक बड़े kamyab (कामयाब) successful लीडर की तरह सोचने नहीं देता है और kamyab (कामयाब) नहीं होने देता है।  जबकि प्रचुरता की कमी की  मानसिकता  वाले लोग दूसरों की तारीफ करने में कंजूसी करते हैं।  

उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि वे दिन-प्रतिदिन  low दृष्टिकोण, की  मानसिकता बनाते जा रहे हैं।  और अपनी सफलता से दूर होते रहे।  

  • जबकि दूसरी तरफ प्रचुरता की मानसिकता  भरपूर  लोगों का दृष्टिकोण बड़ा  होता है।   प्रचुरता की मानसिकता  आपके विचारों एवं दृष्टिकोण,का विस्तार करती है।   जो चीजें आपके पास नहीं है, फिर भी आप ऐसा  सोचते  हैं,  कि वह चीज आपके पास पहले से ही है , तो आपका दृष्टिकोण, विस्तृत  होता है।  
प्रसिद्ध लेखिका "लिसा निकोला के अनुसार

"अगर आप कमी या आभाव पर ध्यान केंद्रित करते हैं ,अगर आप उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं , जो आपके पास नहीं हैं , तो आपको आभाव ही मिलेगा।  "
जब आप अपने परिवार के साथ उनके बारे में बात करते हैं, जब आप अपने दोस्तों के साथ उनके बारे में बात करते हैं, जब आप अपने बच्चों  को बताते हैं कि आपके पास पर्याप्त पैसा नहीं है -" हमारे पास इसके लिए पर्याप्त पैसा नहीं है , हम इसका खर्च नहीं उठा सकते "- तो आप कभी इसका खर्च नहीं उठा पीएंगे, क्योंकि आप आभाव को ज्यादा आकृषित करेंगे। अगर आप प्रचुरता कहते हैं , अगर आप समृद्धि चाहते हैं, तो फिर प्रचुरता पर ध्यान केंद्रित करें। 

एक न एक दिन वह चीज और आपके पास होती है। यही प्रकृति का नियम है।  फसल  काटने से से पहले बोना  पड़ता है।  से इसलिए हर क्षेत्र में प्रचुरता की मानसिकता से  भरपूर रहें।  अपने सफल होने के बीज बोए। यही kamyab (कामयाब) successful hone का सूत्र है।

7:Nishpakshta:निष्पक्षता 

निष्पक्षता हमेशा एक समभाव से चीजों व व्यक्तियों को देखें। इस  अस्तित्व में  न कोई अच्छा है ,ना कोई बुरा है। हमारी पसंद का काम हुआ तो , हम अच्छा महसूस करते हैं ,नहीं तो बूरा महसूस करते हैं।   

  • यही सभी  का सोचने  का सिद्धांत बन जाता है।  जब कि सत्य कुछ और है। जीवन ना अच्छा है,और  ना ही बुरा है।  यह तो जीवन है।  जीवन  ना ही  अच्छा है , ना ही बुरा है।  जीवन  जीने का तरीका है। जैसे हवा बहती है, पानी बहता है।  पानी एवं हवा किसी के साथ भेदभाव नहीं करती  है। सदा अपनी  रवानगी में रहती हैं।  

ऐसे ही हमें  किसी  में जीना है , न ही किसी के लगाव में  जीवन में जीना है। यही  निष्पक्षता   विचार हमारे kamyab (कामयाब) successful  hone ka best easy way है। 

In Conclusion: 

हम चाहे जैसा भी thought process के साथ जीवन जियें , यह कहीं न कहीं हमारे kamyab (कामयाब) successful  hone को प्रभावित करता रहता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के thought process उसे दूसरों से अलग पहचान दिलाती है। 
इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अलग- अलग way of living के  साथ जीने के लिए स्वतंत्र है।   
और यही से प्रत्येक व्यक्ति के kamyab (कामयाब) successful  hone ka best easy way  अलग -अलग होता है। कामयाबी का पैमाना प्रत्येक  व्यक्तिगत  होता है।  
इन्ही 7 best easy ways के  विचारों को अपने जीवन में धारण करके ,कोई  भी व्यक्ति संतोष ,खुशी, सफल एवं शांत जीवन  जीने के साथ kamyab (कामयाब ) successful हो सकता है। 

Comments

Popular posts from this blog

How do we develop the qualities of honor and respect in children?

How do we develop the qualities of honor and respect in children?   Why to  make children responsible and respectful  ?  If every parent is rearing children in the best way, why is today's child growing up and forced to live under stress and depression? Today, children are not obeying their parents.  Irritability is usually seen in the nature of children .  Most parents are troubled by the problem that the child does not listen when they are order. I wrote an article on this problem: how to nourish your child through positive vibration?   I have tried to give solution by drawing your attention to certain aspects. Childhood is like a plant. Seeing this, new energy and love is communicated in everyone's mind. What are the factors due to which children do not behave responsibly and respectfully?    Children's childhood makes us realize our basic qualities. Such as love, bliss, peace, faith, purity etc . Each child is full of basic qua...

How to generate Thought Process towards inner flow?

How to generate Thought Process towards inner flow? The  thought process is a powerful  tool for moving towards innovation and prosperity in inner life. It gives us the courage to turn our dreams into reality.  Welcome to an in-depth exploration of “Life wisdom: Thought Process Towards Inner Flow for a Way to Live Life”. In this enriching journey, we are attempting to delve deeper into the way of living a conscious life. This endeavor helps in uncovering the secrets of inner harmony and also guides towards a fulfilling and purposeful existence.  This title starts a new chapter in this journey from the power of thought process to the inner flow of life knowledge which inspires us to travel our lives with higher thinking and new perspectives. Cultivating Inner Flow: A Guided Thought Process First of all we try to understand the importance and nature of the thought process. Importance of  Thought process  In modern life, the thought process is an important...

How to Achieve Victory Over Fear Through Faith and Determination

Victory Over Fear: How Faith and Determination Help You Overcome Fear Introduction Fear is one of the most powerful emotions in human life. It influences our decisions, our actions, and sometimes even our destiny. But the important question is: Can we achieve victory over fear? From my personal spiritual experience, I believe that victory over fear lies in faith and strong determination. I am neither a doctor nor a psychologist, so this article does not aim to discuss fear scientifically. Instead, I am sharing my personal understanding and spiritual experience about how faith and determination can help us overcome fear. The Root Cause of Fear According to psychology, fear is an emotion. It is not always logical; rather, it is often a psychological response created by our thoughts and memories. Fear is usually stored in our mind as a memory. For example, imagine a small child playing and suddenly a snake appears in front of him. Will the child necessarily be afraid? Not always. The chil...