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Nakaratmak vichar urja ke parbhav

Nakaratmak Vicharon ka Parbhav

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नकारात्मक विचार जैसे ईर्ष्या,डर, चिंता और विपरीत परिस्थितियां हमारी सोच और तंत्रिका ग्रंथियों को नष्ट करती हैं। इसी कारण हमारे अन्दर मानसिक और शारीरिक बिमारियों का जन्म होता है।

नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar) कितनी ऊर्जा का उपयोग करते हैं ? यह जानने से पहले चर्चा करते हैं , कि विचार क्यों महत्वपूर्ण है?  क्या विचार ही जीवन का आधार है ?

आइए इन प्रश्नों से इस blog में विचार विमर्श करेंगे।

यदि हमें सफल होना है या जीवन में कुछ भी बनना है, तो हमारे पास विचार होना आवश्यक है। विचार एक प्रकार से गुरुत्वाकर्षण बल की तरह अदृश्य बल या कृपा है। 

  • विचार से शब्द उत्पन्न होते हैं। शब्दों से उसी प्रकार का कार्य हमारे द्वारा किया जाता है । बार-बार एक कार्य को करने से हमारी आदत का निर्माण होता है । 
  • और अंत में यही परिणाम के रूप में हमारा चरित्र बनता है। यही चरित्र हमारी सफलता, सौभाग्य की ओर ले जाता है। 

Vichar Urja ke Prkar: नकारात्मक विचार ऊर्जा के प्रकार

विचार दो प्रकार से हो सकते हैं सकारात्मक विचार और  नकारात्मक विचार।

  • सकारात्मक विचार का अर्थ है, कि व्यक्ति इस प्रकृति या अस्तित्व की संगति में जीवन जी रहा है । जितना ज्यादा व्यक्ति इस अस्तित्व के करीब पहुंचने की कोशिश करेगा उतना ही ज्यादा उस व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव होगा। 

सकारात्मक विचार की ऊर्जा का इस्तेमाल करके व्यक्ति नकारात्मक विचार ऊर्जा  से उत्पन्न , दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है। हमारा प्रत्येक विचार ऊर्जा generate  करता है ।

जिस प्रकार के विचार होगें उसी प्रकार की vibration हमारे चारों तरफ होगी। क्या कारण है , कि एक व्यक्ति सफल तथा दूसरा व्यक्ति असफल है?  एक व्यक्ति धनी तथा दूसरा व्यक्ति निर्धन है ? 

इसका एक ही उत्तर है कि व्यक्ति ने  भूतकाल में अपने लिए सकारात्मक या नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar) ऊर्जा को खुद ही पैदा किया होगा।

नकारात्मक ऊर्जा विचार (Nakaratmak vichar ka parbhav) के क्या  प्रभाव हो सकतें हैं? 

मन में निम्नलिखित विचार नकारात्मक उर्जा (Nakaratmak urja)  उत्पन्न करते हैं। 

  • अपनी दुर्बलता को महसूस या स्वीकार करना 
  • अयोग्यता को स्वीकार करना।
  •  क्रोध या कुंठा को महसूस करना।
  • अकुशलता, स्वीकार करना।
  • उत्साह और उमंग खोना ।
  • खुद को लताड़ने की आदत होना।
  • अनिष्ट की कल्पना करना ।
  • शंका एवं संदेह करना आदि 
जितनी बार हम इन विचारों को महसूस या स्वीकार करते हैं,
  •  उतनी ही बार हम अपने आत्मविश्वास पर चोट करते हैं। 
  • आत्मविश्वास को कमजोर करते हैं और सफलता को पोषित करने वाली जड़ को काट देते हैं। 

नकारात्मक विचार ऊर्जा  (Nakaratmak vichar urja) को आसान शब्दों में कैसे परिभाषित करें?  

नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar) ऊर्जा का बीज डर है। डर एक मानसिक बीमारी है। यह हमारे चेतन मन में बाहर से आकर पनपती है। डर कुछ ना होते हुए भी , हमारे शरीर व मन की उर्जा को धीरे-धीरे खत्म करता रहता है। 

डर रूपी नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar urja)  ऊर्जा वैसे ही है , 

  • जैसे एक बाल्टी में पानी भरा हो और बाल्टी में एक छोटा सा छेद हो।  
  • जैसे हवा और पानी मिलकर नमी के द्वारा  धीरे-धीरे फौलाद लोहे को जंग में बदल देते हैं। 
90%  डर मिथक है । यह हमारी सोच में हमारे द्वारा स्वयं ही उत्पन्न किए जाते हैं और दोष हम दूसरों पर लगाते रहते हैं। हमारे नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar)  हमारी अज्ञानता के कारण ही हमारे दिमाग और शरीर की ऊर्जा को धीरे धीरे deplete करते रहते हैं।

डर एक बीज की तरह कार्य करता है  ।

  • अपने पर विश्वास न करना ।
  • अपनी जीवन प्रक्रिया को न समझना।
  • अपने को इस प्रकृति या अस्तित्व से बड़ा मानना।
  • अपने अवचेतन मन पर विश्वास न करना।
आदि कारणों से हम हमेशा नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar) ऊर्जा को जनरेट करते हैं । 

  • इस नकारात्मक विचार ऊर्जा के उपयोग के कारण 70% बीमारियां मानसिक होती है तथा 30 % शारीरिक होती है।
  • नकारात्मक विचार ऊर्जा के उपयोग के कारण साइकोसोमेटिक बीमारियां उत्पन्न होती हैं और शरीर में बीमारी परिलक्षित होती है 

Nakaratmak vichar urja ke upyog ka parinam: नकारात्मक विचार ऊर्जा के उपयोग का परीणाम।

नकारात्मक विचार ऊर्जा के उपयोग के कारण ही हम निम्नलिखित समस्याओं के शिकार होते हैं ।
  • Spiritual level पर ठीक से काम नहीं कर पाते हैं।
  • Brain पर effect पड़ता है और mental level पर कमजोर हो जाते हैं ‍‍।
  • Physical level पर सबसे ज्यादा Damage होने के कारण हमारा उत्साह, उमंग को खो देते हैं ।
आइये नकारात्मक विचार    को इन दो उदाहरणों को लेकर नकारात्मक  विचार ऊर्जा के उपयोग को समझने का प्रयास करते हैं।

1:"घृणा"। 

"घृणा"  के कारण मन में ऋणात्मक भावनाएं पनपने लगती है। इस कारण विषाक्त पदार्थ शरीर में इकट्ठे होने लगते हैं। यह विषाक्त पदार्थ घातक रसायनों में बदलकर , सांप के विष के बराबर घातक होते हैं।

  • यह विष शरीर के समस्त नाड़ियों में फैलने लगता है। 
  • अब हम इस विष को फैलने से रोक नहीं सकते हैं।
  • इसके परिणाम स्वरूप शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होकर काम करना बंद कर देते हैं। 
  • जैसे पाचन शक्ति नष्ट होना ।
  • रक्त बनने की प्रक्रिया प्रभावित होना।
  • शरीर ऊर्जा का हृास होना।
2:  "शंका और संदेह"।

दूसरा नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar) है "शंका और संदेह" करना ।इस प्रकार के  नकारात्मक विचारों के कारण जो नकारात्मक ऊर्जा उपयोग होकर परीणाम देती है, वह इस प्रकार से है।
  • शंका और संदेह के कारण अपनी क्षमता पर विश्वास न करना। 
  • Blood pressure को बढ़ाने वाले  हार्मोन उत्पन्न होते हैं ।
  • व्यक्ति हमेशा दीन-हन बना रहता है और अपना आत्मबल खो देता है। 
  • व्यक्ति कभी कोई बड़ा कार्य नहीं कर सकता है।
  • मस्तिष्क की उत्पादक ऊर्जा समाप्त होने लगती हैं।
  • इसके परीणाम में असफलता, हताशा एवं निराशा हाथ लगती है ।

Nakaratmak Vicharon se Mukti Ke Sutra.

हमारी चेतना से नकारात्मक अतीत की यादों को हटाने के लिए तीन अलग-अलग प्रकार की प्रक्रियाएँ हैं:

  1. संशोधित करना - एक नकारात्मक अतीत की घटना को सकारात्मक, लाभकारी रूप में संशोधित किया जाता है और फिर चेतना में संग्रहीत किया जाता है।
  2. भूलना - किसी नकारात्मक अतीत की घटना की यादें भुला दी जाती हैं और हमारी बातचीत में या हमारे चेतन मन या विचारों में मौजूद नहीं होती हैं, लेकिन उन यादों के निशान अवचेतन मन में मौजूद होते हैं।
  3. मिटाना - नकारात्मक अतीत का कोई निशान चेतना में मौजूद नहीं है और इसकी यादें अवचेतन से भी हटा दी जाती हैं।

उपर्युक्त तीनों प्रक्रियाओं को प्राप्त पूर्ण करने के लिए हमें Visualization and Pranayam  की विधि करनी होगी । आइए कुछ सरल अभ्यास करके हम Nakaratmak urja se मुक्त होने का प्रयास करते हैं।

Visualization ka message and Parbhav 

आप का मन सकारात्मक instructions लेकर शरीर के प्रत्येक  cells पर काम करता है।  आप  कोई भी Seen लें और इस प्रकार से process करें। तो आपको परिणाम  अवशय प्राप्त  होंगे। 

जैसा हम देखते हैं , वैसा बनते जाते हैं। और जैसा हम सोचते हैं ,वैसा बनते जाते हैं। दोनों का मतलब  एक ही है। 
  • सोचना=======> देखना =========>REALITY.
इसी सूत्र का प्रयोग करके हम Visualization उपयोग करके अपने मन से किसी भी  समस्या  को हल करने के  अपने अंदरूनी  system को मजबूत कर सकते हैं। 
  • Seen==>Visualization(kriya yog : क्रिया योग) ==>Thought generate ==> Positive ==> Power==>Result.
  • SEEN=====>VISUALIZATION====>REALITY.

Visualization (kriya yog : क्रिया योग):  करने से  पहले क्या करें?

आप  nakaratmak urja se ग्रसित  है या नहीं  सबसे पहले तो अपने inner life software  पर विश्वास करें। यह लगातार हमारी आंतरिक संरचना को स्वयं ही तैयार करता रहता है। शरीर और मन से  Visualization (kriya yog : क्रिया योग)   के लिए तैयार होना। 

  •  इसलिए धैर्य और विश्वास रखें। 
  •  मन में शान्ति एवं शक्ति के thought generate करने की लगातार कोशिश करें।
  • Visualization (kriya yog : क्रिया योग) पर  विश्वास करें कि, यह काम करता है, रिजल्ट हमारे fever में  देता है । 
  •  हमारे शरीर व मन का निर्माण हमारे inner life software द्वारा हुआ है। इस  शरीर से ही हमने जीवन के सारे  अनुभव को महसूस करना है। तथा मन से सरे अनुभवों को संग्रह करना है।  
  • सुबह 3 या 4 बजे  उठकर तन और मन से  तैयार होना है। 
  • शरीर  हमेशा आराम चाहता है ।  मन हमेशा short cut अपनाता है। इसलिए  मन एवं शरीर की नहीं सुननी है। 
  • शरीर एवं  मन पर कार्य करना है। अर्थात शरीर की कोशिकाओं को काम (exercise) चाहिए।  इसलिए हर रोज ३० मिनट exercise करें। यह शरीर के लिए काम करना है।  यह शरीर का धन्यवाद करने जैसा है। 
  • Morning Walk  सबसे Best तरीका है शरीर को ऊर्जा से  भरपूर  करने का   मॉर्निंग में हमारे हार्मोन्स release होते हैं। यह शरीर को नया जीवन देने जैसा है। 
  • मन के लिए ध्यान करना है। मन को control नहीं करना है।  मन को कोई भी control  नहीं कर सकता है। 
  • मन को एक बच्चा समझना है और इससे प्यार से बात करनी है। इस तरह से मन हमरी बात मानता  है। 
  • शरीर एवं मन को मजबूत करने से ही, हमारी ऊर्जा सही दिशा में प्रवाहित  करती है। 

 Pranayama कैसे करें? 

  • 10 Minute प्राणायाम करें। शरीर और मन को शांत करें। 
  • अपने नाक से अंदर एवं बहार जाती हवा पर ध्यान लगाएँ। 
  • आपको अपने मन में पहले अपनी स्वस्थ  तस्वीर बनानी है। 
  • अपनी  स्वास्थ्य clear Image को बार-बार मन में Imagine करना है। 
  • आपको visualize करना है, कि आप स्वस्थ रहे हैं ।
  • और आपकी  प्रत्येक cells स्वस्थ है, प्रत्येक cell  स्वास्थ्य शरीर का निर्माण कर रही है। 
  • आपने  सपनों को  मन में लाना है ,जैसे आप सचमुच में अपने dreams को enjoy कर रहे हो।
  • अपने inner life software पर विश्वास करना है , कि आप स्वस्थ हो रहे हैं ।

In Conclusion.

 सभी कभी न कभी नकारात्मक विचार (Nakaratmak vichar) ऊर्जा के दौर से गुजरे हैं। मनुष्य होने के कारण आज हम सभी नकारात्मक ऊर्जा के उपयोग एवं प्रभाव के कारण कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हैं। 
चाहे हम अपने को दोष दें या ना दे, लेकिन मैं यही कहना चाहूंगा कि यदि हम सकारात्मक नहीं सोच सकते हैं, तो कम से कम नकारात्मक न सोचें। क्या  भला हो जाएगा हमारा नकारात्मक  विचार ऊर्जा के उपयोग से।

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