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samsya ka hal man ke star par kaise hota hai

Samsya ka hal man ke star par kaise hota hai? (समस्या का हल मन के स्तर पर  कैसे होता है ?) 

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समस्या  हर किसी के जीवन में आती रहती हैं। व्यक्तिगत तौर पर समस्या का समाधान सभी करते हैं। क्योंकि समस्याएं अलग अलग व्यक्ति के लिए अलग अलग हो सकती है ं। 
प्रसिद्ध लेखिका "लुईस एल हे" के शब्दों में परिस्थितियां/समस्या को देखने का अर्थ है.......
  • हम खुद परिस्थितियों को जन्म देते हैं और फिर अपनी कुंठा के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए अपनी ऊर्जा नष्ट करते हैं। कोई व्यक्ति, कोई स्थान और कोई चीज हमसे अधिक शक्तिशाली नहीं है, क्योंकि अपने मस्तिष्क में केवल हम ही सोचते हैं।जब हम अपने मस्तिष्क में शांति, तालमेल और संतुलन बना लेते हैं तो यह सब हमारे जीवन में भी आ जाता है।
समस्याओं को  face  करने का नाम जीवन है। कुछ प्रश्नोत्तर के जरिए अपने अनुभव को आपके साथ साझा कर रहा हूं कि मैंने कैसे अपनी समस्याओं के हल को मन के स्तर पर सुलझाया।
  • क्या  Samsya आने पर हमारा दृष्टिकोण  विस्तृत होता है? 
  • क्या  samsya ka hal man ke stara par , हमारे अंदर से  पैदा हो सकता है ?  
  • हमें समस्या के समाधान के लिए अपने अन्दर क्यों झांकना चाहिए?
इसी  प्रश्न को लेकर  मैं आपके समक्ष  उपस्थित हुआ हूँ। आइये इस  प्रश्न का उत्तर  man ke star par ढूंढ़ने  का प्रयास  करते हैं। 

 समस्याएं ना आए तो जीवन नीरस हो जाएगा क्योंकि samsya ka hal  होने पर हम ऊर्जा से भरपूर और अच्छा महसूस करते हैं। 
  • लेकिन समस्या को देखने का हमारा  नजरिया कैसा है?
  • हम  Samsya को कैसे स्वीकार करते हैं?
  • हम समस्याओं  पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं?
ये प्रश्न ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि लोग समस्याओं के आने पर परेशान हो जाते हैं। चिड़चिड़े हो जाते हैं , कुछ  लोग तनाव  के शिकार हो जाते हैं। 
समस्याओं के बारे में चिंता करने के बजाय खुद पर काम करके हम समस्याओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसके लिए हमें अपने प्रभाव के क्षेत्र पर काम करना होगा। 
  • समस्याएं हमारे अंदर मूल रूप में परिवर्तन करती हैं। 
  • जीवन में देखने वाले सुनने के नए आयाम की शक्ति हमारे अंदर पैदा होती है। 
  • आंतरिक बदलाव से हम स्वयं के तथा बाहरी लोगों की समस्याओं को देखते हैं। 
  • इस  कारण हमारा नजरिया विस्तृत होता है और हमारी समस्याओं को देखने के नजरिये  में भी बदलाव होता है।  
समस्याओं को शांत एवं  धैर्य पूर्वक को देखने से एवं Samsya  ko स्वीकार करने से hal man ke stara par  हमारे अंदर से ही मिल जाते हैं । अर्थात हमारे इनर  लाइफ सॉफ्टवेयर के  पास हमारी हर samsya ka hal  hota hai 

हम chetan man ke star पर samsyaon ke hal बाहर  ढूंढते रहते हैं ,जबकि Samsya ka hal avchetan man ke stara par हमारे अंदर मौजूद है। 
क्या Samsya ka hal hamaare andar  है ? आज मैं दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं के हल अनुभव के आधार पर आपके समक्ष रख रहा हूं। 
कैसे अपनी Samsyaon ke hal आसानी से तथा कुछ सामान्य methods को अपनाकर जीवन को Samsya  mukt  बना सकते हैं।

Samsya ko dekhane ka najriya hi samsya hai: समस्या को देखने का नजरिया ही समस्या है।

Reason 1:  हम किसी भी समस्या को जिस नजरिए से देखते हैं।वह नजरिया हमारा अपना नहीं है।
आज हम जो हैं , जैसे हैं , जिस तरीके से जी रहे हैं, वह नजरिया
  • हमारे परिवार द्वारा, 
  • रिश्तेदारों द्वारा, दोस्तों द्वारा तथा 
  • दूसरे लोगों द्वारा उनकी सोच के अनुसार एवं परिस्थितियों द्वारा लिखा गया है ।
Reason 2.   हमारी जीवन की रचना बचपन में लिखी जाती है। बचपन की प्रोग्रामिंग का संस्कार मजबूत होता है।  और हम बड़े होकर  उसी Thought Process  से  Samsya को देखते है। 

हमारा  Samsya ka hal  करने का तरीका पुराना होता है । उन लोगों के द्वारा हमें Samsya hal  करने का तरीका बताया जाता हैं , जिन्हें खुद समस्या solve करने का तरीका पता नहीं है। 
प्रत्येक Humans being एक Unique Personality है। प्रत्येक की अपनी अलग रचना है । तो कैसे Samsya को Solve करने का दुसरों का  तरीका हमारी Samsya ko hal कर सकता है?

Man ke star par Samsya ka hal: मन के स्तर और शरीर के स्तर पर  एवं रोगों का हल करना ।

किसी को भी हमारी  Samsya एवं रोग से कोई फर्क नहीं पड़ता है। मैं समस्या में हूं या मैं बीमार हूं  ,तो केवल मुझे फर्क पड़ता है। आश्वासन हर कोई दे सकता है, लेकिन दर्द तो मेरे अंदर है, उसे मुझे ही ठीक करना है। Samsya  ka hal  सिर्फ मेरे द्वारा ही  हल किया जाएगा।
Samsya And Rog  ka hal.
  1. मन के स्तर पर हल : मन Software है तो Body  Hardware है। Software में खराबी है तो Programming अर्थात Thought Process को Change करना पड़ेगा। 
  2. और शरीर के स्पर पर हल :शरीर Hardware है। शरीर में रोग आ चुका है तो कुछ अभ्यास एवं  प्रयोग शरीर पर करने होंगे। एक्सरसाइज ,योग , प्राणायाम मोटिवेशनल किताबे पड़ना आदि शरीर के लिए करने होंगे। 
जैसे शरीर का भोजन अन्न होता है उसी प्रकार मन का भोजन  Thought होता है ।  मन के भोजन थॉट का  शरीर पर जबरदस्त प्रभाव पडता है ।
  • मन का भोजन कैसा हो?
  • क्या हमारे मन का भोजन हमारे हिसाब से होना चाहिए ,या  समाज के हिसाब से?  
इन प्रश्नों में ही समस्याओं के पनपने कारण है।इन प्रश्नों का उत्तर जानने का प्रयास करने के लिए मैंने Computer hard disk को मन से तुलना कर  उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है । 

कैसे हम अपने मन के भोजन को सही करके एक खुशहाल जिंदगी जी सकते हैं?  अपनी Daily life की problems  से छुटकारा पा सकते हैं।
हम अस्तित्व की  Perfect  रचना है या नहीं इसका उत्तर हम तब  तक नहीं दे सकते हैं । जब तक हमने अपने "Inner Software" अर्थात "मैं"  को नहीं जाना। 
अपने Inner Software को जानने के बाद ही हम Way of Living   को Change करके किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। 
आइए आज की वार्ता करने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि इन तीन शब्दों का क्या अर्थ एवं कार्य है।
  1. शरीरक्या "मैं"ही  शरीर हूं?
  2. मन: क्या "मैं"  ही मन हूं ?
  3. मैं : "मैं"कौन हूं?
इन तीनों वाक्यों का अर्थ अलग-अलग हैं या तीनों एक ही है ?  एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं ।
जब हमारे पांव में चोट लगती है तो हम क्या कहते हैं ?
  • मेरे पांव में चोट लगी है ।
  • मेरे शरीर के पांव पर चोट लगी है ।
जब दर्द की बात हो।है तो हम क्या कहते हैं?
  • मेरे पांव में दर्द हो रहा है ।
  • मेरे शरीर के पांव में दर्द हो रहा है ।      
यहां पर सभी पहला वाक्य कहते हैं, कि मेरे पांव में चोट लगी है, और पांव में दर्द हो रहा है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कहता है, कि मेरे शरीर के पांव में चोट लगी है व शरीर के पांव में दर्द हो रहा है । इस उदाहरण से स्पष्ट हो गया होगा कि चोट शरीर को लगती है, दर्द मुझे होता है।
  • मुझ से क्या तात्पर्य है ? अर्थात मेरे शरीर के अंग में चोट लगती है तो उस समय हम कहते हैं, कि मुझे चोट लगी है। 
  • जबकि सत्य यह है कि पांव , शरीर का ही अंग है और पांव में चोट लगी है । तो दर्द कहां होता है शरीर की कोशिकाओं को , मन को या "मैं" को?
जहां पर चोट लगी वहां  पर दर्द महसूस होता है लेकिन  पूरे शरीर को दर्द नहीं होना चाहिये। शरीर के अन्य अंग स्वस्थ हैं। वह अपना कार्य करते रहते हैं लेकिन चोट या घाव होने के कारण हमारी मनोदशा में बदलाव होता है । मनोदशा का अर्थ man  से है ।
  • मन को  दर्द महसूस होता है और मन का संबंध सीधे शरीर से है। शरीर भी उसी मनोदशा में चलता है । क्योंकि हम को कंट्रोल करने वाला मन ही है। 
यदि मन ठीक नहीं है तो हम कैसे ठीक हो सकते हैं? अर्थात man ke star  par samsyaon एवं रोगों का जन्म  होता है एवं मन  एवं शरीर के स्तर  पर ही समस्याओं एवं रोगों के हल भी मिलते हैं। अर्थात  समस्याओं  के हल हमारे अंदर ही है। 

Hardware and Software : शरीर एवं मन के स्तर पर समस्या -

शरीर और मन दो अलग-अलग चीजें हो सकती हैं या कहें कि man  भी शरीर का ही भाग है।  जिसमें सूचनाएं इकट्ठीे रहती हैं। हमारा शरीर हार्डवेयर की तरह है।  
Hardware  का अर्थ कंप्यूटर की भाषा में कहें, वह सब कुछ जिसे हम अपने हाथों से छू सकते हैं, वह हार्डवेयर है । वैसे ही  हमारा दिमाग से लेकर पूरा शरीर हार्डवेयर है। 

दिमाग को हम कंप्यूटर की हार्ड डिस्क की तरह कह सकते हैं । जिसमें सूचनाओं का संग्रहण होता है।   
Hard Disk  का अर्थ कंप्यूटर में यह है कि जहां पर कंप्यूटर से संबंधित फाइलें सूचनाएं। ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर आदि  Save रहती हैं ।

Hard Disk  की तरह है , मन का कार्य।उपयोगकर्ता द्वारा जहां पर  सूचनाओं को स्टोर भी  किया जाता है , वह स्थान कंप्यूटर में हार्ड डिस्क का होता है। यह सेकेंडरी मेमोरी कहलाता है। यादों का भंडार भी कह सकते हैं। 
  • इसी प्रकार हार्ड डिस्क में सूचनाएं इकट्ठा  रहती हैं।इन सूचनाओं को हम सॉफ्टवेयर कहते हैं, सॉफ्टवेयर का अर्थ है वह सब कुछ जिससे हम हाथों से छू नहीं सकते, केवल देख सकते हैं और सुन भी सकते हैं। जैसे  हार्ड डिस्क कंप्यूटर का एक भाग है। वैसे ही दिमाग़ हमारे शरीर का एक अंग है ।
इस दिमाग को ही मन कहते हैं, मन कुछ और नहीं है जैसे हार्ड डिस्क में सूचना ,प्रोग्राम आदि सॉफ्टवेयर के रूप में होते हैं। वैसे ही सूचना , प्रोग्राम , सॉफ्टवेयर के रूप में हमारे मन में भी होते है। 
अब आपको कुछ कुछ अंतर पता चल रहा होगा कि शरीर व मन एक सिक्के के दो पहलू हैं । एक के बिना दूसरा नहीं हो सकता है।
हम यहां पर Hardware and software  के माध्यम से मन एवं शरीर की रचना को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। हार्ड डिस्क में कंप्यूटर को ऑन ऑफ करना या Booting System करने का सॉफ्टवेयर Install होता है। 
  • कैसे कंप्यूटर को चालू करना है?
  • कैसे कंप्यूटर काम करेगा?
  • कैसे व किस प्रकार कंप्यूटर कार्य करता है आदि?        
उपरोक्त सूचनाएं Operating system  का काम है या ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर भी कहते हैं। कैसे कंप्यूटर USER के साथ Interact करेगा आदि-आदि सूचनाओं का एक जाल ऑपरेटिंग सिस्टम कहलाता है।
इसी प्रकार हमारा मन  भी कार्य करता है। हमारे शरीर का सञ्चालन करता है तथा बाहर से आने वाली सूचनाओं पर प्रतिक्रिया भी देता है। 
Hard disk में खाली स्थान भी होता है तथा  जहां पर हमारे द्वारा किसी कार्य को पूर्ण करके फाइल के रूप में सेव किया जाता है। 
इसी प्रकार से हमारे मन में भी हमारे शरीर को चलाने का सॉफ्टवेयर मौजूद रहता है । जिससे मैं अपने ब्लॉग में इननर सॉफ्टवेयर कहता हूं अर्थात मेरी असली पहचान क्या है?                                                
Samsya avm Rog:VIRUS की तरह है, समस्या एवं रोग । 
इस  भौतिक युग में हम कुछ गलत सॉफ्टवेयर  भी अपने अंदर डाउनलोड कर देते हैं। जिन्हें वायरस सॉफ्टवेयर कह सकते हैं । जैसे  डर, भय,अहंकार, दोष देना, गलत तरीके से धन कमाना, शोषण करना, दूसरे का हिस्सा हड़पना और दूसरे के लिए बुरी भावना पैदा करन, गंदे विचार पैदा करना आदि  मुख्य Samsya  रुपी सॉफ्टवेयर है ।

जो हमारे मन में प्रवेश कर हमारे मन के सॉफ्टवेयर को तोड़ने में लग जाते हैं। अर्थात समस्याओं एवं रोगों की को जन्म देते हैं।  
                                   
मैं आपको एक बात अवश्य बताना चाहता हूं कि कंप्यूटर की भाषा  मशीन लैंग्वेज है अर्थात हम कुछ भी टाइप करें। कंप्यूटर केवल 0 और 1 को समझता है अर्थात 0  का मतलब और लाइट ऑफ होना और 1  का अर्थ है लाइट ऑन होना है।  
इसी प्रकार ऑन ऑफ को लैंग्वेज में बदलकर  समझ कर फिर हमें output  के रूप में हमारे हिसाब की भाषा में दिखाता है।                         
कंप्यूटर virus बाहर से आया एक program होता है।  यह  हमारे सही  प्रोग्राम की भाषा को उल्टा कर देता है अर्थात यदि पहले भाषा के रूप में यदि 01010 लिखा था , तो  virus  से इन्फेक्ट  होने के बाद भाषा 10101 हो  जाएगी  और अंदर का सॉफ्टवेयर गड़बड़ा जाएगा।

हमारे मन में भी  VIRUS Program की तरह समस्या (Samsya) आ जाती हैं। 

इसी प्रकार हमारे मन में भी  virus रूपी  सॉफ्टवेयर  अर्थात जिन्हे समस्याएं भी कह सकते हैं, आने से हमारे  man ke andar के  प्रोग्राम का  सॉफ्टवेयर बदल जाता है। और हम परेशान हो  जाते हैं। 
man ke star पर गड़बड़ी होने से शरीर के स्तर पर भी गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है। रोग उत्पन्न हो जाते हैं। 
हम साइकोसोमेटिक बीमारियों के शिकार हो जाते हैं जिनमें अवसाद, तनाव, आदि  होने के फलस्वरूप अन्य बीमारी हार्ट अटैक आदि का खतरा बना रहता है।

Samsya ka hal Inner Software men: एंटीवायरस: समस्याओं का हल। 

अब हम बात करते हैं कि कैसे  वायरस से खराब सॉफ्टवेयर को ठीक करें? कंप्यूटर में एंटीवायरस डालने से उक्त सॉफ्टवेयर जो पहले भाषा वायरस के कारण 10101 हो गयी थी  अब  01010 अपनी पुरानी अवस्था में आ जाती  है।

इसी प्रकार हमारे मन में जब हम आध्यात्मिक चेतना, योग, मोटिवेशनल किताबें पढ़ते हैं तथा मोटिवेशनल वीडियोस देखते  हैं । ये सब एंटीवायरस का काम करते हैं । 
मेरे ब्लॉक का मुख्य उद्देश्य भी एक एंटीवायरस के रूप में आपके सामने अपने इनर लाइफ सॉफ्टवेयर को पेश करने का है। 
इन सभी एंटीवायरस सॉफ्टवेयर से हम अपने मन के समस्या रुपी वायरस को मार सकते हैं। 

मन में जो समस्या एवं रोग है और  मनोदशा को बिगाड़ रहे उन्हें हल करके पुनः अपने इनर सॉफ्टवेयर पर विश्वास करके अपने Original State  अर्थात शांत ,धैर्य ,विश्वास ,स्वस्थ , खुशहाली को पा सकते हैं। अर्थात हमारी  समस्याओं के हल हमारे ही अंदर  मौजूद हैं। 
मैं और सिर्फ मैं ही अपने बारे में 100% जानता हूं :
मैं और सिर्फ मैं ही अपने बारे में 100% जानता हूं कि मैं क्या हूं? मेरी क्या गलतियां है ? मेरी क्या अच्छाइयां हैं ? मेरी शक्ति क्या है? मेरे को क्या पसंद है ? क्या  पसंद नहीं है ? सिर्फ मैं ही अपने शरीर एवं  के बारे में हंड्रेड परसेंट जानता हूं।  
  • जब मैं अपने बारे में हंड्रेड परसेंट जानता हूं । तो क्यों ना मैं अपनी जिम्मेदारी स्वयं लूं । दूसरे को अपनी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। यदि मैं स्वयं को , गलतियों के लिए एवं समस्याओं को लेकर  जिम्मेदार ठहराता  हूं , तभी हम को समस्याओं के उत्तरों के विकल्प हमें अंदर से मिलते हैं,अन्यथा नहीं।
  • क्योंकि जब मैं इस शरीर का बारे में सब जानता हूं, तो हमें अपने समस्याओं के सलूशन बाहर नहीं ढूंढने चाहिए। हमें अपनी समस्याओं के सलूशन अंदर ढूंढने चाहिए।

Samsyaon Ke hal kaise karen : समस्याओं के हल कैसे ढूंढ सकते हैं

हम शांत बैठ कर अपने अवचेतन मन से बात करें। अपने इनर सॉफ्टवेयर से बात करें। यही पर  आपको अपनी Samsayon ke hal  जरूर मिलेंगे। 
लेकिन उससे पहले हमें  यह स्वीकार करना पड़ेगा,  कि मैं  इनर सॉफ्टवेयर हूँ एवं अवचेतन मन मेरे हर प्रश्न का जवाब देता है।यह मेरे अंदर मेरी हर Samsya  एवं रोग से लड़ने का हल है। सबसे पहले अपनी गलतियों को स्वीकार करना पड़ेगा। 
अवचेतन मन एवं इनर लाइफ सॉफ्टवेयर द्वारा समस्याओं एवं रोगों के हल Samsyaon rog ke hal निकालना 
मन  एवं शरीर के star par samsyka hal kaise hota hai  ? इस प्रश्न का उत्तर जानने से पहले मैं आपको एक प्रश्न  पूछना चाहूंगा। 
  • एक सुंदर घर बनवाने के लिए हमें सर्वप्रथम क्या करते हैं?
आप सभी का उत्तर होगा : सबसे पहले अपने दिमाग में घर की clear Image बनाते हैं। जिस प्रकार का  घर बनवाना हो। 
घर की इमेज बनाते समय या मानचित्र बनाते समय हर एक छोटी से छोटी बात का ध्यान रखते हैं। 
  • Bedroom  कहां पर होगा ?
  • किचन कहां पर होगा। 
  • बालकनी कैसे होगी?
  • खिडकी एवं दरवाजे कैसे होने चाहिए. 
इन सब प्रश्नों की एक Clear Image हम अपने दिमाग में बनाते हैं। हर  एक चीज की के लिए  Clear image  अपने मानसिक चित्र में चित्रित करते हैं। 
  • Clear Image  मन में बनाने का अर्थ है। अपने Subconscious mind को Clear image  का चित्र Send कर  देते हैं । और हमारा avchetan man  काम करना शुरू कर देता है , कि घर सुंदर कैसे बने ?
अवचेतन मन इस इमेज को   भौतिक रचना में बदलने एवं साकार करने में लग जाता है। बाकी काम तो अस्तित्व का है।

Result. मानसिक स्तर पर समस्याओं के हल एवं रोगों  से मुक्त  Clear Image को  बनाकर भौतिक रचना को साकार करना है।

जिस प्रकार घर का मानचित्र पहले बनता है , यह है Software जैसा है। फिर धरातल पर  भौतिक रचना अर्थात घर बनता है। यह Hardware जैसा है।  यही हमारा मूल सिद्धांत है।
पहले  मानसिक रचना बनती है , फिर भौतिक रचना निर्मित होती है। यही सिद्धान्त हमारी Samsya एवं रोग से छुटकारा पाने में भी  100% काम करता है ।
इस उदाहरण के द्वारा हम अपनी समस्या अपने रोगों को दूर कर सकते हैं

Samsayon ko dekhane ka trika badlen : समस्याओं  को देखने का तरीका बदलें।

Solution 1: अवचेतन मन द्वारा। 
सबसे पहले अपनी समस्याओं एवं  रोगों  को स्वीकार करना । जैसे ही हम किसी गलती को स्वीकार करते हैं, Samsya  को स्वीकार करते हैं तो हमें एक असीम शांति का अनुभव प्राप्त होता है और अंदर से हमें उन समस्याओं के उत्तर मिलना शुरू हो जाते हैं। Acceptance  50% Solution   है।
  • सबसे पहले अपनी समस्या और रोग  को स्वीकार करें , कि हां  मुझे यह समस्या और रोग है। 
  • Samsya को देखने का तरीका बदलें।
  • Samsya को देखने का  पुराना Thought Process  को छोड़ दें। इस samsya ko hal karne कोशिश नहीं करनी है , बल्कि शांत बैठ कर समस्या को देखना है। मन की गहराई में जाना है ।
  • 10:00  मिनट रोज  भी काफी समय है।
  • अब समस्या को Subconscious mind  के हवाले कर दें। 
  • आपको कुछ अलग नहीं करना है। 
  • Subconscious mind को अपना सेवक या  अपनी समस्या का हल करने वाला डॉक्टर समझकर सूचना दे दें।
  • अब मन में, घर के मकान के नक्शे की तरह , समस्या मुक्त होने की Clear Picture  को  मन के मानचित्र  में बनाए , 5 मिनट का समय भी बहुत होता है।
अब अपने Subconscious mind , को शरीर की कोशिकाओं , प्रकृति का , अस्तित्व का धन्यवाद करे।  जैसे आपके Samsya hal  हो गयी हो। 

Solution:2. इनर लाइफ सॉफ्टवेयर द्वारा 

समस्याओं एवं रोगों से मुक्ति का आसान तरीका अभी अपने ऊपर घर का एक उदाहरण को समझा। 
  • मैं एक  अनुभव आपके साथ साझा कर रहा हूं। 
यदि आप और ज्यादा गहराई में समस्याओं एवं रोगों के हल जानना  कहते हैं , तो आप  इनर लाइफ सॉफ्टवेयर की  हेल्प से समस्याओं एवं रोगों से मुक्ति का मार्ग अपने अंदर से ही खोज सकते हैं।  आइये एक उदाहरण से समझने का प्रयास  करते हैं। 
  • आपके हाथ में गर्म चाय गिर गई है , और आपका हाथ थोडा  जल कर चुका है या चाकू से आपका हाथ की उंगली थोड़ा कट गई। आप क्या करते हैं ?
  • आप सभी का Answer होगा  थोड़ा  जलने एवं कटने पर परेशान नहीं होते हैं। अंदर से आवाज आती है , तो थोड़ी सी चोट है, ठीक हो जाएगी।
  • ऐसा विश्वास कहां से आता है?
  • ऐसा विश्वास हमारे Inner Software से आता ह। 
  • जैसे ही हमारा हाथ जलता है,या कटता  है , उसी क्षण Inner Software  काम करना शुरू कर देता है। 
  • Damage Cells  को किनारे कर नहीं स्वस्थ Cells का निर्माण कटे स्थान पर होना शुरू हो जाता है। 
  • समय के साथ यह चोट ठीक हो जाती है। लेकिन समय लगता है।
इस प्रकार से रोग  की स्थिति में भी,  हमें अपने मन तथा शरीर दोनों के स्तर   मानसिक चित्रण कर तथा भौतिक स्तर पर योग, मेडिटेशन, Exercise कर अपने लिए नया स्वस्थ शरीर का निर्माण कर सकते हैं। अपनी समस्याओं के हल अंदर से ही प्राप्त  कर सकते हैं।

In Conclusion :

अपनी सारी समस्याओं और रोग के हल हमारे अंदर ही मौजूद हैं। हमें बाहर खोजने की जरूरत नहीं है। दुनियां की कोई भी 
Samsya  हमारे इनर लाइफ सॉफ्टवेयर  प्रोग्राम से बड़ी नहीं है।  
Samsya ,chetan man ke stara par   बड़ी लगती है , जबकि avchetan man ke stara par  किसी भी samsya  एवं रोग ka hal  हमारे अंदर ही इनर सॉफ्टवेयर में हैं। 

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